The world is facing a real challenge with food shortage. If we believe the experts then after 27 years and 256 days there will be no food.

दुनिया पहले कभी न देखे गए खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है। यह अजीब लग सकता है लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि अब से कुछ साल बाद भोजन और पानी को लेकर विश्व युद्ध लड़े जाएंगे। वैज्ञानिकों द्वारा एक प्रलय के दिन की उलटी गिनती शुरू की गई है जिसके अनुसार हमारे पास लगभग 27 वर्ष हैं जब तक कि हमारे पास भोजन समाप्त नहीं हो जाता।

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मिट्टी बचाओ या मृदा बचाओ जिसे इंग्लिश में SAVE SOIL MOVEMENT कहा जा रहा है एक अभियान है जिसे सदगुरु जी द्वारा शुरू किया गया है जो एक योगी और गुरु है और ‘ईशा फाउंडेशन’ के संस्थापक है। 3.5 अरब से अधिक लोगों के Save Soil समर्थन को प्रदर्शित करने के लिए, सदगुरु 24 देशों में 30,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा एक अकेले मोटरसाइकिल पर करेंगे। यात्रा लंदन में शुरू होगी और दक्षिणी भारत में कावेरी बेसिन में समाप्त होगी जहां सदगुरु द्वारा शुरू की गई कावेरी कॉलिंग परियोजना ने अब तक 125,000 किसानों को मिट्टी को पुनर्जीवित करने और कावेरी नदी के घटते पानी को फिर से भरने में मदद करने के लिए 62 मिलियन पेड़ लगाने में सक्षम बनाया है।

Save Soil Movement by Sadhguru | मिट्टी बचाओ अभियान क्या है?
Save Soil Movement by Sadhguru | मिट्टी बचाओ अभियान क्या है?

मिट्टी बचाओ या मृदा बचाओ जिसे इंग्लिश में SAVE SOIL MOVEMENT कहा जा रहा है एक अभियान है जिसे सदगुरु जी द्वारा शुरू किया गया है जो एक योगी और गुरु है और ‘ईशा फाउंडेशन’ के संस्थापक है।

3.5 अरब से अधिक लोगों के Save Soil समर्थन को प्रदर्शित करने के लिए, सदगुरु 24 देशों में 30,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा एक अकेले मोटरसाइकिल पर करेंगे। यात्रा लंदन में शुरू होगी और दक्षिणी भारत में कावेरी बेसिन में समाप्त होगी जहां सदगुरु द्वारा शुरू की गई कावेरी कॉलिंग परियोजना ने अब तक 125,000 किसानों को मिट्टी को पुनर्जीवित करने और कावेरी नदी के घटते पानी को फिर से भरने में मदद करने के लिए 62 मिलियन पेड़ लगाने में सक्षम बनाया है।

Why Save Soil? | मिट्टी को क्यों बचाएं?

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स्‍वर्गीय देवनाथ मेरे अभिन्‍न मित्रों में थे। आज भी जब उनकी याद आती है, तो वह रंगरेलियां आंखों में फिर जाती हैं, और कहीं एकांत में जाकर जरा रो लेता हूं। हमारे देर रो लेता हूं। हमारे बीच में दो-ढाई सौ मील का अंतर था। मैं लखनऊ में था, वह दिल्‍ली में; लेकिन ऐसा शायद ही कोई महीना जाता हो कि हम आपस में न मिल पाते हों। वह स्‍वच्‍छन्‍द प्रकति के विनोदप्रिय, सहृदय, उदार और मित्रों पर प्राण देनेवाला आदमी थे, जिन्‍होंने अपने और पराए में कभी भेद नहीं किया।

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मृदुला मैजिस्ट्रेट के इजलास से ज़नाने जेल में वापस आयी, तो उसका मुख प्रसन्न था। बरी हो जाने की गुलाबी आशा उसके कपोलों पर चमक रही थी। उसे देखते ही राजनीतिक कैदियों के एक गिरोह ने घेर लिया और पूछने लगीं, कितने दिन की हुई ? मृदुला ने विजय-गर्व से कहा-मैंने तो साफ-साफ कह दिया, मैंने धरना नहीं दिया। यों आप जबर्दस्त हैं, जो फैसला चाहें, करें। न मैंने किसी को रोका, न पकड़ा, न धक्का दिया, न किसी से आरजू-मिन्नत ही की। कोई ग्राहक मेरे सामने आया ही नहीं। हाँ, मैं दूकान पर खड़ी ज़रूर थी। वहाँ कई वालंटियर गिरफ्तार हो गये थे। जनता जमा हो गयी थी। मैं भी खड़ी हो गयी। बस, थानेदार ने आ कर मुझे पकड़ लिया।

Premchand — Jail | मुंशी प्रेमचंद — जेल | Story | Hindi Kahani
Premchand — Jail | मुंशी प्रेमचंद — जेल | Story | Hindi Kahani

हिन्दी कला आपके लिए प्रस्तुत करते है संपूर्ण श्री हनुमान चालीसा ( Hanuman Chalisa in Hindi) दुनिया भर में फैले बजरंग बली के भक्तो के लिए जो महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है |

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

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